मझिगवां पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, निजी खातों में भुगतान और हैंडपंप खर्च पर उठे सवाल।

संवाददाता: आलोक सिंह
सीतापुर
जनपद सीतापुर के विकासखंड परसेंडी की ग्राम पंचायत मझिगवां में पंचायत निधि के उपयोग को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम पंचायत में कथित वित्तीय गड़बड़ियों और विकास कार्यों में अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है। मामले में पंचायत निधि से निजी बैंक खातों में भुगतान किए जाने के आरोप लगाए गए हैं, वहीं हैंडपंप मरम्मत और रीबोर कार्यों में भी भारी खर्च दिखाए जाने पर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं।
ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वर्ष 2022 से 2023 के बीच पंचायत खाते से लगभग 4 लाख 46 हजार रुपये से अधिक की धनराशि विभिन्न निजी खातों में ट्रांसफर की गई। आरोप यह भी है कि कई भुगतान शासन के निर्धारित नियमों और वित्तीय प्रक्रिया के विपरीत किए गए। शिकायतकर्ताओं ने अलग-अलग तिथियों में हुए भुगतानों को संदिग्ध बताते हुए पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की है।
वहीं पंचायत क्षेत्र में लगे सरकारी हैंडपंपों की स्थिति को लेकर भी ग्रामीणों में असंतोष है। ग्रामीणों का कहना है कि कई हैंडपंप लंबे समय से खराब पड़े हुए हैं, जिससे लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद अभिलेखों में वर्ष 2021 से 2025 के बीच हैंडपंप मरम्मत, रीबोर और संबंधित कार्यों पर करीब 20 लाख रुपये से अधिक खर्च दर्शाया गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कागजों में लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यों का असर नजर नहीं आता। गांव के लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।
इस मामले को लेकर भारतीय किसान यूनियन (किरण) के प्रदेश अध्यक्ष पुनीत यादव ने भी प्रशासन से जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि पंचायत निधि और विकास कार्यों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है और यदि अनियमितताएं हुई हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
अब लोगों की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है कि आरोपों की सत्यता सामने आने के बाद आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।




