नशे की दलदल में धंसती देश की युवा पीढ़ी, बिखरता जा रहा परिवार।

जर्नलिस्ट नीलेश पटेल
नशा उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ा “संकट”
आज देश एक गंभीर संकट से जूझ रहा है, और वह है युवाओं का तेजी से नशे की ओर बढ़ना। जो युवा देश का भविष्य माने जाते थे, आज वही युवा शराब, तंबाकू, गुटखा, सिगरेट, गांजा और अन्य नशीले पदार्थों के दलदल में फंसते जा रहे हैं। यह स्थिति न सिर्फ व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए घातक है, बल्कि पूरे परिवार और समाज को भी बिखेर रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब ये चीजें शरीर के लिए हानिकारक हैं, तो इनकी बिक्री इतनी आसानी से क्यों हो रही है? आज गांव से लेकर शहर तक पान की गुमटी, किराने की दुकान और ठेकों पर शराब, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट खुलेआम बिक रही है। प्रशासन की सख्ती सिर्फ कागजों पर दिखती है। 18 साल से कम उम्र के बच्चों को भी आसानी से नशीले पदार्थ मिल जा रहे हैं। जब बाजार में यह जहर खुले में मिलेगा तो युवा पीढ़ी इसे खरीदेगी ही।
*नशा नहीं, परिवार टूट रहा है*
पहले कहा जाता था कि नशा सिर्फ एक व्यक्ति को बर्बाद करता है, लेकिन आज की सच्चाई यह है कि नशा पूरे परिवार को तोड़ रहा है। युवा शराब के नशे में लिप्त होकर अपनी जिम्मेदारियों से भाग रहा है। पति शराब पीकर घर आता है तो पत्नी से लड़ाई, बच्चों से मारपीट, रोज का कलह आम हो गया है। कई परिवारों में तो हालत तलाक तक पहुंच गई है।
घर की कमाई का बड़ा हिस्सा नशे में उड़ रहा है। बाप की दिहाड़ी शराब में, बेटे की जेब का पैसा गुटखा-सिगरेट में जा रहा है। इससे बच्चों की शिक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है। फीस के लिए पैसा नहीं, किताबों के लिए पैसा नहीं, लेकिन नशे के लिए पैसा कहीं से भी आ जाता है। ऐसा परिवार कभी आगे नहीं बढ़ सकता, वह सिर्फ बिखरता है।
पढ़ा-लिखा युवा जब नौकरी नहीं पाता तो तनाव में नशे का सहारा लेता है। दोस्तों के बीच खुद को बड़ा दिखाने के लिए युवा नशा शुरू करता है। आज की फिल्मों और रील्स में शराब-सिगरेट को स्टाइल के रूप में दिखाया जाता है, युवा उसी की नकल करता है। माता-पिता काम में व्यस्त हैं, बच्चों पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।
*कैसे होगा निदान ?*
इस समस्या का समाधान सिर्फ सरकार से नहीं, बल्कि हम सबको मिलकर करना होगा।
नशे की अवैध बिक्री पर सख्त रोक लगानी होगी, स्कूल-कॉलेज के 100 मीटर के दायरे में नशे की बिक्री पर पूरी तरह पाबंदी होनी चाहिए। अपने बच्चों से दोस्त जैसा व्यवहार करना होगा, उनके साथ समय बिताना होगा, उनकी संगत पर नजर रखनी होगी। जन-जागरूकता अभियान चलाना होगा। गांव-गांव में नशा मुक्ति के लिए चौपाल लगानी होगी। खेल, योग, और हुनर सीखने की ओर मोड़ना होगा। जब युवा के पास रोजगार और लक्ष्य होगा तो वह नशे से खुद दूर हो जाएगा।
अगर आज हमने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो आने वाली पीढ़ी पूरी तरह से खोखली हो जाएगी। नशा मुक्त युवा ही नशा मुक्त परिवार बना सकता है, और नशा मुक्त परिवार ही मजबूत भारत का निर्माण कर सकता है। इसलिए लिए हम सब मिलकर एक आवाज़ उठाएं।
*जर्नलिस्ट नीलेश पटेल*




