कटनी बरगवां शराब दुकान और चखना सेंटर पर उठे सवाल, वहां मजार होने का दावा ।

संवाददाता: ब्यूरो सुमित मलिक
कटनी/मध्यप्रदेश
उमरिया वाले बाबा की मजार पर लगा ताला, ठीक बगल में शराब दुकान और सामने चखना सेंटर; सरकारी जमीन पर दुकान होने के दावे की जांच की मांग
शहर की बरगवां दुकान के बारे में ही लिखा हो….।शहर के बरगवां क्षेत्र में संचालित शराब दुकान को लेकर अब धार्मिक आस्था, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि के स्वामित्व से जुड़े सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, शराब दुकान के ठीक बगल में उमरिया वाले बाबा की मजार स्थित है, जिस पर वर्तमान में ताला लगा हुआ है। वहीं मजार के सामने ही चखना सेंटर संचालित होने की बात कही जा रही है। इस पूरे मामले ने प्रशासनिक स्तर पर स्थल निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच की मांग को तेज कर दिया है।
मजार के बगल में शराब दुकान, सामने चखना सेंटर
बरगवां क्षेत्र में मौके की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि एक ओर मजार स्थित है, जबकि उससे सटकर शराब दुकान संचालित हो रही है। मजार के सामने चखना सेंटर होने की स्थिति भी बताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थल के आसपास इस तरह की व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने से श्रद्धालुओं और आसपास रहने वाले लोगों के लिए असहज स्थिति निर्मित हो सकती है। हालांकि शराब दुकान और चखना सेंटर को मिली वैधानिक अनुमति तथा उनकी लोकेशन से संबंधित नियमों की स्थिति संबंधित विभागों के रिकॉर्ड और स्थल निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मजार पर ताला किसने लगाया, यह भी बना सवाल
इस मामले में सबसे अहम सवाल मजार पर लगे ताले को लेकर है। स्थानीय स्तर पर यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि मजार पर ताला किसके द्वारा लगाया गया और इसके पीछे क्या कारण है। मजार के प्रबंधन, स्वामित्व और देखरेख की जिम्मेदारी किस संस्था अथवा व्यक्ति के पास है, यह भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।
यदि मजार सार्वजनिक धार्मिक आस्था का स्थल है तो उसकी वर्तमान स्थिति और श्रद्धालुओं के लिए पहुंच बंद होने के कारणों की जानकारी प्रशासन को लेना चाहिए। वहीं यदि किसी विवाद अथवा प्रशासनिक कारण से मजार बंद है तो उससे संबंधित आदेश और अभिलेख भी सार्वजनिक किए जाने की मांग उठ रही है।
शराब दुकान की जमीन को लेकर भी जांच की मांग
मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू शराब दुकान के लिए उपयोग की जा रही जमीन के स्वामित्व से जुड़ा है। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि जिस भूमि पर शराब दुकान संचालित हो रही है, वह शासकीय भूमि है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
स्थानीय स्तर पर शराब दुकान से जुड़े कारोबारी के रूप में पंकज राय का नाम बताया जा रहा है। भूमि के वास्तविक स्वामित्व, आवंटन, लीज तथा शराब दुकान संचालन की अनुमति से संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
यदि भूमि शासकीय पाई जाती है तो यह भी जांच का विषय होगा कि उसका उपयोग किस उद्देश्य के लिए दर्ज है और शराब दुकान के संचालन के लिए संबंधित विभाग ने किस आधार पर अनुमति प्रदान की है।
लोकेशन सत्यापन पर भी उठ रहे सवाल
शराब दुकान की लोकेशन को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर स्पष्टीकरण की आवश्यकता बताई जा रही है। आबकारी विभाग द्वारा दुकान के संचालन से पहले स्थल का सत्यापन किस आधार पर किया गया, धार्मिक स्थल की स्थिति उस समय क्या थी और चखना सेंटर के संचालन की अनुमति किन नियमों के तहत दी गई—इन बिंदुओं की जांच आवश्यक है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मजार और शराब दुकान की स्थिति लंबे समय से ऐसी ही है, तो संबंधित विभागों द्वारा पूर्व में इसका निरीक्षण किया गया था या नहीं, यह भी सामने आना चाहिए।
इन सवालों के जवाब तलाशना जरूरी
मजार पर ताला किसने लगाया और किस कारण से लगाया गया?
मजार का प्रबंधन एवं देखरेख किसके पास है?
क्या मजार की वर्तमान स्थिति की जानकारी प्रशासन को है?
शराब दुकान जिस भूमि पर संचालित है, उसका वास्तविक स्वामित्व क्या है?
यदि भूमि शासकीय है तो दुकान संचालन के लिए अनुमति किस आधार पर दी गई?
शराब दुकान की लोकेशन का आबकारी विभाग द्वारा कब सत्यापन किया गया?
मजार के सामने चखना सेंटर के संचालन की अनुमति किस नियम के तहत है?
क्या संबंधित विभागों ने मौके का संयुक्त निरीक्षण किया है?
क्या धार्मिक स्थल अथवा स्थानीय नागरिकों की ओर से कोई आपत्ति दर्ज कराई गई है?
रिकॉर्ड और स्थल निरीक्षण से साफ हो सकती है तस्वीर
बरगवां के इस मामले में फिलहाल सामने आए दावे और मौके की स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है। ऐसे में केवल आरोप-प्रत्यारोप के बजाय राजस्व रिकॉर्ड, आबकारी विभाग की अनुमति, भूमि आवंटन अथवा लीज संबंधी दस्तावेज और स्थल निरीक्षण के आधार पर वास्तविक स्थिति सामने लाना जरूरी है।
प्रशासन यदि राजस्व, आबकारी और स्थानीय निकाय से जुड़े अधिकारियों की संयुक्त टीम से मौके का निरीक्षण कराए तथा संबंधित दस्तावेजों की जांच करे तो शराब दुकान की वैधानिक स्थिति, भूमि के स्वामित्व और मजार की वर्तमान स्थिति को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है।
अब प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें
बरगवां में मजार के ठीक बगल में शराब दुकान और सामने चखना सेंटर होने की स्थिति के साथ-साथ शासकीय भूमि पर दुकान संचालित होने के दावे ने मामले को गंभीर बना दिया है। स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्य सामने लाए।
यदि जांच में किसी नियम का उल्लंघन सामने आता है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जाए और यदि सभी गतिविधियां वैधानिक अनुमतियों के तहत संचालित पाई जाती हैं तो प्रशासन संबंधित नियमों और अनुमतियों की स्थिति भी स्पष्ट करे।
फिलहाल बरगवां का यह मामला धार्मिक स्थल की स्थिति, भूमि के स्वामित्व, शराब दुकान की वैधानिकता और चखना सेंटर की अनुमति—इन चार प्रमुख बिंदुओं पर प्रशासनिक जांच की मांग के साथ चर्चा में है।




