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यूपी

सपा नेता आजम खां को कोर्ट का झटका, दो पैनकार्ड के मामले में सजा बढ़ी एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने सजा सात साल से बढ़ाकर दस साल की।

संवाददाता: शारिक खान  

रामपुर 

बता दे कि जुर्माने में भी बढ़ोत्तरी, अब 50 हजार की जगह देने होंगे पांच लाख समाजवादी पार्टी के कददावर नेता आजम खां की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। अब कोर्ट ने अब्दुल्ला आजम के दो पैनकार्ड के मामले में सजा बढ़ाने वाली अपील पर फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आजम खां की सजा सात साल से बढ़ाकर दस साल कर दी है। साथ ही जुर्माना भी 50 हजार से बढ़ाकर पांच लाख रूपये किया है।

भाजपा के शहर विधायक आकाश सक्सेना ने छह दिसंबर 2019 को सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने अलग-अलग जन्मतिथियों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवाए। एक दस्तावेज़ में जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 और दूसरे में 30 सितंबर 1990 बताई गई थी। आरोप यह भी था कि चुनाव लड़ने की पात्रता हासिल करने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर किया गया। जिसके बाद पुलिस ने आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत मुकदमा दर्ज किया था। लंबे ट्रायल के बाद रामपुर की एमपी/एमएलए कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को फैसला सुनाया था। अदालत ने आजम खां और अब्दुल्ला आजम दोनों को दोषी करार देते हुए 7-7 साल की सजा और 50-50 हजार रूपये जुर्माना लगाया था। कोर्ट के फैसले के दोनों को कोर्ट से ही हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया था। बाद में आजम खां की अपील पर भी सुनवाई हुई, लेकिन अप्रैल 2026 में सत्र अदालत ने सजा बरकरार रखी।

इस मामले में भाजपा विधायक आकाश सक्सेना की ओर से एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट में अपील दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने आजम खां और अब्दुल्ला आजम की सजा बढ़ाने की मांग की थी। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के बाद शनिवार को फैसला सुनाया। सहायक शासकीय अधिवक्ता सीमा राणा ने बताया कि कोर्ट ने आजम खां की सजा को बढ़ा दिया है। अब उनकी सजा सात साल से बढ़कर दस साल हो गई है, जबकि जुर्माना 50 हजार रूपये से बढ़कर पांच लाख रूपये कर दिया गया है।

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*देशभर में अपराधियों के लिए नजीर साबित होगा कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: आकाश*

 

 

 

रामपुर। सपा नेता आजम खां की सजा बढ़ाने को लेकर आए एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट के फैसले के दौरान भाजपा के शहर विधायक आकाश सक्सेना भी कोर्ट में मौजूद रहे। उन्होंने कहा है कि यह ऐतिहासिक फैसला देशभर में अपराधियों के लिए नजीर साबित होगा। कोर्ट का फैसला कानून के प्रति न्यायपालिका की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अब्दुल्ला आजम के दो पैनकार्ड मामले में अदालत द्वारा आज़म खां की सजा को सात वर्ष से बढ़ाकर दस वर्ष करना तथा पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाना यह स्पष्ट संदेश देता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। यह फैसला उन लोगों के लिए एक बड़ी सीख और मिसाल है, जो अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए नियमों और कानूनों को नजरअंदाज करने का प्रयास करते हैं। लोकतंत्र में न्यायपालिका की निष्पक्षता और कानून का सम्मान ही व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है। आज आवश्यकता है कि हर नागरिक कानून का पालन करे और पारदर्शिता एवं ईमानदारी को अपने जीवन का आधार बनाए। न्यायालय का यह निर्णय समाज में कानून के प्रति विश्वास को और मजबूत करने का कार्य करेगा।

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