खादी ग्रामोद्योग विकास समिति, मड़ियाहूं, जौनपुर के माध्यम से 31 नंबर चरखे से सूत कातने तथा उससे खादी वस्त्र तैयार करने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया।

09 से 17 अगस्त 2026 तक आयोजित किए जा रहे ‘हर घर तिरंगा अभियान’ के अंतर्गत जनपद में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन उत्साह एवं उल्लास के साथ किया जा रहा है। इसी क्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की खादी संस्थाओं द्वारा रेशम खादी ग्रामोद्योग विकास समिति, मड़ियाहूं, जौनपुर के माध्यम से 31 नंबर चरखे से सूत कातने तथा उससे खादी वस्त्र तैयार करने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के माध्यम से आमजन को स्वदेशी एवं हस्तनिर्मित वस्त्रों के निर्माण की प्रक्रिया से परिचित कराते हुए खादी के अधिकाधिक उपयोग का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि खादी केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि स्वदेशी, स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की भावना का प्रतीक है। राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण में भी खादी के वस्त्र का विशेष महत्व है। चरखे से सूत कातने की परंपरा भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ी रही है और महात्मा गांधी ने चरखे एवं खादी को स्वदेशी आंदोलन का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया था।
चरखे से तैयार किए गए सूत को बुनकरों द्वारा कपड़े में परिवर्तित किया जाता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत कारीगरों, बुनकरों एवं अन्य श्रमिकों को रोजगार और आय के अवसर प्राप्त होते हैं। खादी एवं ग्रामोद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने तथा ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इस अवसर पर चरखे से सूत कातने एवं खादी निर्माण की पूरी प्रक्रिया का प्रदर्शन कर लोगों को स्थानीय उत्पादों को अपनाने, स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा देने तथा ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से महात्मा गांधी के स्वदेशी, स्वावलंबन एवं आत्मनिर्भरता के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया गया। ‘हर घर तिरंगा अभियान’ के अंतर्गत आयोजित यह प्रदर्शन राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान के साथ-साथ खादी, ग्रामीण कारीगरों और स्थानीय उत्पादों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा।




