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मध्य प्रदेश

कटनी नगर निगम में जिम्मेदारियों पर उठे सवाल — आउटसोर्स कर्मचारी को मिली बड़ी भूमिका, कमिश्नर ने बैठाई जांच।

संवाददाता: सुमित मलिक

कटनी ,मध्यप्रदेश 

नियुक्ति नहीं, जिम्मेदारी निर्धारण पर विवाद — जांच रिपोर्ट के बाद साफ होगी स्थिति नगर निगम कटनी में एक आउटसोर्स कर्मचारी को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि वर्ष 2020 में आउटसोर्स आधार पर सफाई कर्मचारी के रूप में नियुक्त संदीप बर्मन वर्तमान में स्वच्छता निरीक्षक (एसआई) जैसी जिम्मेदारियां निभा रहा है, जिससे नगर निगम के स्थापना विभाग की कार्यप्रणाली और नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।

 

हाल में संदीप बर्मन स्वास्थ्य विभाग के स्वास्थ्य निरीक्षक संजय सोनी की निगरानी में वार्ड क्रमांक 1 से 16 तक कार्यों का संचालन कर रहा है। आरोप यह भी है, कि वह कई वार्ड दरोगाओं के कार्यों का समन्वय और निगरानी कर रहा है, जबकि उसकी मूल नियुक्ति आउटसोर्स सफाई कर्मचारी के रूप में बताई जा रही है।सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि जब नगर निगम में कई नियमित कर्मचारी और वार्ड दरोगा 10 से 15 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, तब एक आउटसोर्स कर्मचारी को इतनी खास जिम्मेदारी किस वजह से सौंपी गई? कर्मचारियों के बीच इस नियुक्ति से खासी नाराजगी है, लेकिन उच्च पद पर बैठे लोगों के डर से उनका गुस्सा बाहर नही निकल पा रहा है।सूत्रों की मानें तो संदीप बर्मन फर्जी हाजिरी लगाकर बेजा लाभ लेने जैसे काम से भी कोई गुरेज परहेज नही करता है, ऐसे आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।मामले को लेकर जब नगर निगम आयुक्त तपस्या सिंह परिहार का पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच कराने की बात कही है।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो क्या संदीप बर्मन को उसके मूल पद से हटा कर वैधानिक कार्यवाही की जाएगी? स्थापना विभाग जिसके जरिए उसने तरक्की की सीढ़ीयां चढी हैं उन्के खिलाफ़ भी कोई ठोस कार्यवाई की जाएगी? क्या वर्षों से सेवा दे रहे नियमित कर्मचारियों को पदोन्नति या जिम्मेदारी का अवसर मिलेगा? या फिर नगर निगम में आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमों से परे जाकर जिम्मेदारियां सौंपने की परंपरा जारी रहेगी? तेज तर्रार आईएएस कमिश्नर के रहते इतना बड़ा खेल कैसे हुआ? यह भी एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब जाँच रिपोर्ट के बाद सामने आएगा। बहरहाल नगर निगम के कर्मचारियों और आम नागरिकों का कहना है कि यदि नियुक्ति और जिम्मेदारियों के निर्धारण में पारदर्शिता नहीं होगी, तो लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होगा।

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