प्रधानमंत्री की अपील को दरकिनार कर रहे जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के सीईओ शासकीय आवास आवंटित होने के बाद भी जबलपुर से कर रहे अपडाउन, उठ रहे कई सवाल।

कटनी ढीमरखेड़ा
संवाददाता : सुकचैन पटेल
ढीमरखेड़ा
देश में लगातार बढ़ती पेट्रोल – डीजल की खपत, ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को लेकर केंद्र सरकार द्वारा समय – समय पर जनजागरूकता अभियान चलाए जाते रहे हैं। प्रधानमंत्री स्वयं कई मंचों से सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील कर चुके हैं कि वे अपने मुख्यालय में निवास करें, अनावश्यक वाहन उपयोग कम करें तथा ईंधन बचत को प्राथमिकता दें। प्रधानमंत्री का स्पष्ट संदेश रहा है कि यदि अधिकारी अपने कार्यस्थल पर ही निवास करेंगे तो न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि आम जनता को भी बेहतर और समय पर प्रशासनिक सेवाएं मिल सकेंगी । इसी बीच जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा में पदस्थ मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) यजुवेंद्र कोरी को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि उन्हें ढीमरखेड़ा में शासकीय आवास आवंटित होने के बावजूद वे मुख्यालय में निवास नहीं कर रहे हैं और प्रतिदिन जबलपुर से ढीमरखेड़ा अपडाउन कर रहे हैं। इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोगों का कहना है कि जब शासन द्वारा स्पष्ट रूप से मुख्यालय में रहने के निर्देश दिए गए हैं, तब जिम्मेदार अधिकारी द्वारा उन निर्देशों का पालन नहीं किया जाना कई सवाल खड़े करता है।स्थानीय सूत्रों के अनुसार सीईओ यजुवेंद्र कोरी का प्रतिदिन जबलपुर से ढीमरखेड़ा आना-जाना बना रहता है। क्षेत्र के लोगों का दावा है कि उनके आवागमन की जानकारी सिहोरा टोल प्लाजा से भी प्राप्त की जा सकती है। लोगों का कहना है कि यदि प्रतिदिन इतनी लंबी दूरी तय की जा रही है तो इससे शासन के ईंधन बचत अभियान की भावना पर भी असर पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी मुख्यालय में उपलब्ध शासकीय आवास में रुकने के बजाय निजी सुविधा को प्राथमिकता दे रहे हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि अधिकारी यदि मुख्यालय में निवास करें तो क्षेत्रीय समस्याओं का निराकरण अधिक तेजी से हो सकता है।ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले कई ग्रामीण क्षेत्रों में आए दिन सड़क, पेयजल, निर्माण कार्य, पंचायत योजनाओं और जनसुनवाई से जुड़े मामले सामने आते रहते हैं।ऐसे में यदि संबंधित अधिकारी मुख्यालय में उपलब्ध रहें तो आम लोगों को राहत मिल सकती है। लेकिन प्रतिदिन अपडाउन की स्थिति में कई बार अधिकारी समय पर उपलब्ध नहीं हो पाते, जिससे आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि शासन द्वारा शासकीय अधिकारियों को इसलिए आवास उपलब्ध कराया जाता है ताकि वे आपात स्थिति में भी तत्काल उपस्थित रह सकें।पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों में तो मुख्यालय पर अधिकारियों की मौजूदगी और भी अधिक आवश्यक मानी जाती है, क्योंकि गांवों से जुड़े कार्यों में अचानक निरीक्षण, शिकायतों की जांच, विकास कार्यों की निगरानी तथा जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय जैसी जिम्मेदारियां लगातार बनी रहती हैं। इसके बावजूद यदि अधिकारी मुख्यालय में निवास नहीं करते तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। जानकारों का कहना है कि शासन के नियमों के अनुसार कई विभागों में अधिकारियों को मुख्यालय पर निवास करने के निर्देश दिए जाते हैं। विशेष परिस्थितियों में ही मुख्यालय छोड़ने की अनुमति दी जाती है।ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के सीईओ को प्रतिदिन अपडाउन की अनुमति प्राप्त है अथवा नहीं। यदि अनुमति नहीं है तो फिर नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए विभागीय स्तर पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री द्वारा ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर दिए गए संदेश केवल आम जनता के लिए ही नहीं, बल्कि सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। यदि जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी ही इन अपीलों को गंभीरता से नहीं लेंगे तो आम जनता के बीच गलत संदेश जाएगा। लोगों का यह भी कहना है कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और पर्यावरण प्रदूषण के दौर में शासन द्वारा किए जा रहे बचत अभियानों को सफल बनाने में सभी की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।




