जनसुनवाई में दिखा डीएम का एक्शन: खेत का विवाद मिनटों में सुलझा, दो पीड़ित परिवारों को ऑफिस बुलाकर सौंपे आयुष्मान कार्ड और अन्त्योदय कार्ड।

संवाददाता: शारिक खान
रामपुर
विलासपुर के किसान का चकमार्ग विवाद फोन पर आदेश के बाद राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने तत्काल कराया खत्म आयुष्मान भारत योजना के तहत आर्थिक तंगी और गंभीर बीमारी से जूझ रहे टांडा व मिलक के मरीजों को मिली मुफ्त इलाज की संजीवनी
जिलाधिकारी श्री अजय कुमार द्विवेदी का जनता दर्शन आमजन के लिए बड़ी राहत लेकर आया। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण की मिसाल पेश करते हुए डीएम ने न सिर्फ जमीनी विवाद को एक फोन कॉल पर सुलझा दिया, बल्कि स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मोहताज दो गरीब परिवारों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत तत्काल कार्ड एवं अन्त्योदय राशन कार्ड बनवाकर अपने हाथों से सौंपे। जनसुनवाई में दिखाई गई इस प्रशासनिक संवेदनशीलता और सख्ती से जहां एक किसान को दबंगों से निजात मिली, वहीं आर्थिक तंगी और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को सरकार की तरफ से सालाना पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की पक्की गारंटी मिल गई।
चकमार्ग का विवाद, एक फोन कॉल और समाधान
तहसील बिलासपुर निवासी किसान राजेन्द्र सिंह लंबे समय से अपने खेतों की जुताई को लेकर परेशान थे। कुछ काश्तकार उन्हें न केवल खेत जोतने से रोक रहे थे, बल्कि चकमार्ग से उनके ट्रैक्टर का रास्ता भी बाधित कर दिया था। यह मामला जब जनसुनवाई में जिलाधिकारी के समक्ष पहुंचा, तो उन्होंने बिना कोई समय गंवाए कलेक्ट्रेट सभागार से ही सीधे उपजिलाधिकारी (एसडीएम) बिलासपुर को फोन मिलाया। डीएम के कड़े निर्देशों का असर यह हुआ कि तत्काल राजस्व विभाग और पुलिस की एक संयुक्त टीम गठित कर मौके पर भेजी गई। टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर ही विवाद को शांत कराया और किसान राजेन्द्र सिंह के ट्रैक्टर के आवागमन का रास्ता साफ करवाकर उनकी समस्या का स्थायी निस्तारण कर दिया।
*आयुष्मान से जगी जिंदगी की आस*
जनता दर्शन केवल जमीनी विवादों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी गरीबों के लिए संजीवनी साबित हुआ। विगत जनता दर्शन में तहसील मिलक की रहने वाली श्रीमती देवेन्द्र कौर ने अपने पति और बच्चे के इलाज के लिए आर्थिक लाचारी का हवाला देते हुए गुहार लगाई थी। वहीं, तहसील टाण्डा के शिकारपुर निवासी नवाब अली एक बेहद गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ थे। जिलाधिकारी ने दोनों परिवारों की दयनीय आर्थिक स्थिति को गंभीरता से लिया और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को आयुष्मान भारत योजना के तहत तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। विभागीय फुर्ती का नतीजा यह रहा कि कुछ ही दिनों में दोनों परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनकर तैयार हो गए।
*डीएम ने खुद सौंपे कार्ड, दीं शुभकामनाएं*
अक्सर सरकारी दफ्तरों में कार्ड बनने के बाद भी लाभार्थियों को चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन यहां तस्वीर बिल्कुल उलट थी। दोनों परिवारों के आयुष्मान कार्ड तैयार होने के बाद जिलाधिकारी ने खुद उन्हें अपने कार्यालय में आमंत्रित किया। डीएम ने अपने हाथों से दोनों पीड़ित परिवारों को यह कार्ड सौंपे और उनके बेहतर स्वास्थ्य व जल्द स्वस्थ होने की कामना की। प्रशासनिक मुखिया के इस आत्मीय व्यवहार से लाभार्थियों के चेहरे पर स्पष्ट खुशी और संतोष नजर आया।
*पारदर्शी और समयबद्ध निस्तारण ही सर्वाेच्च प्राथमिकता*
कलेक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों की बैठक लेते हुए जिलाधिकारी ने सख्त लहजे में कहा कि जन शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री जी की मंशा के अनुरूप आमजन की समस्याओं का त्वरित, प्रभावी और पूरी तरह पारदर्शी समाधान ही प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। डीएम ने सभी विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे फरियादियों की शिकायतों को पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ सुनें और तय समय सीमा के भीतर उनका गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करें, ताकि जनता का प्रशासन पर विश्वास और मजबूत हो सके।




